मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

अमलेन्दु उपाध्याय को जान से मारने की धमकी

प्रति,
सचिव
भारतीय प्रेस परिषद्
नई दिल्ली,


महोदय
पत्रकार संगठन जेयूसीएस आपका ध्यान अपने साथी पत्रकार अमलेन्दु उपाध्याय
को एक हिंदी दैनिक अखबार ‘स्वाभिमान टाइम्स’ के मालिक बनवारी लाल कुशवाहा
द्वारा जान से मारने की धमकी देने की ओर आकृष्ट करना चाहता है। अमलेन्दु
उपाध्याय पिछले काफी समय से इसी अखबार में सह-सम्पादक के पद पर कार्यरत
हैं।



14 मार्च 2011 को उनके मोबाइल फोन 09312873760 पर बनवारी लाल कुशवाहा
मोबइल नंबर 09309052522 से फोन कर भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए उन्हें
जान से हाथ धो बैठने की धमकी दी। बनवारी लाल कुशवाह स्वाभिमान
टाइम्स के मुख्य प्रबंध निदेशक हैं। उनका धौलपुर में दूध का भी धंधा है।
कुशवाहा का कहना था कि 12 मार्च को उनके धौलपुर स्थित प्लांट के उद्घाटन
की 15 फोटो उनके अखबार के पहले पन्ने क्यों नहीं लगाई गई? हालांकि
अमलेंदु उपाध्याय का कहना है कि पहले पन्ने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।
ऐसे में अमलेंदु उपाध्याय को जान से मारने की धमकी देना संगीन मामला है,
जिसकी पूरी जांच होनी चाहिए।



बनवारी लाल कुशवाहा के इस आपराधिक कृत्य में स्वाभिमान टाइम्स के संपादक
निर्मलेंदु साहा की भी सहभागिता है। निर्मलेंदु साहा भी पहले इस पत्रकार
को धमकियां दे चुके हैं। अखबार के मालिक और संपादक द्वारा एक पत्रकार का
उत्पीड़न न काबिले बर्दाश्त है। यह न केवल पत्रकारिता के उसूलों के खिलाफ
है, बल्कि व्यक्ति के मानवाधिकारों का भी हनन है। चूंकि यह सर्वविदित है
कि कई बड़े अपराधी और काले धन वाले व्यक्ति अपने को पाक साफ बनाए रखने के
लिए मीडिया के धंधे में पैर जमा चुके हैं, जिसके चलते ईमानदार पत्रकारों
की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ऐसे में यह अहम जिम्मेदारी भारतीय प्रेस
परिषद की है कि वह ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोके।
महोदय हमें दुखः के साथ कहना पड़ रहा है कि अमलेन्दु उपाध्याय द्वारा
परिषद् को सूचित किये जाने के बाद भी उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं
की गई। हम परिषद् से मांग करते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए
और पत्रकार धमकाने वाले दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाए।

द्वारा
विजय प्रताप, शाह आलम, राजीव यादव, शाहनवाज आलम, ऋषि कुमार सिंह, अवनीश
राय, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, शिवदास, देवाशीष प्रसून, दिलीप, प्रबु़द्ध
गौतम, अरुण उरांव,वरुण शैलेश, अरुण वर्मा, अर्चना मेहतो, सौम्या झा,
विवेक मिश्रा, प्रवीण मालवीय, पूर्णिमा उरांव, सीत मिश्रा, नवीन कुमार।


संपर्क – 9696685616, 9452800752,9873672153

रविवार, 17 अप्रैल 2011

यूपीसी सेवा बंद, डाक विभाग के निजीकरण की साजिश

मीडिया स्टडीज ग्रुप की अपील-
यूपीसी सेवा समाप्त करने के खिलाफ आवाज उठायें।

डाक विभाग द्वारा यू पी सी की सेवा समाप्त कर दिया गया है। यूपीसी एवरीभिएशन है। अंडर (यू) पोस्टिंग(पी) सर्टिफिकेट(सी)। यू पी सी में डाक विभाग का कुछ भी अतिरिक्त खर्च नहीं होता है बल्कि डाक विभाग को इससे लाभ होता है। उपभोक्ता साधारण डाक को उचित टिकट लगाने के बाद उसे लेटर बॉक्स में डालने के बजाय पोस्ट ऑफिस में दे देता है। उपभोक्ता इस लिफाफे के साथ एक सादे कागज पर तीन रूपये का टिकट लगा देता है और उस टिकट युक्त कागज पर पोस्ट ऑफिस उक्त पत्र की प्राप्ति के सबूत के तौर पर मात्र एक मुहर लगा देता है। उपभोक्ताओं को यह छूट होती है कि तीन रूपये के टिकट पर एक साथ तीन लिफाफे यू पी सी के तहत दे सकता है। नाम से स्पष्ट है कि पोस्ट किए गए लिफाफे का महज एक प्रमाण पत्र उपभोक्ता को मिल जाता है। जिस देश में 76 प्रतिशत से ज्यादा आबादी 20 रूपये से कम पर गुजारा करती है वैसे समाज में इस तरह की सेवा की उपयोगिता का अंदाजा लगाया जा सकता है।लेकिन डाक विभाग ने यह सेवा समाप्त करके डाक विभाग में निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश की है। डाक विभाग ने पहले से ही रजिस्टर्ड डाक काफी महंगा कर दिया है।रजिस्टर्ड डाक महंगा किए जाने के पीछे देश में कूरियर कंपनियों को बढ़ावा देने योजना रही है। यह डाक विभाग की सबसे पुरानी सेवाओं में एक है। इसका उपयोग इन दिनों वैसे लोगों ने भी बड़े पैमाने पर करना शुरू किया है जो सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल करते हैं। हमारा ये मानना है कि इस फैसले के जरिये सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल करने वाले कार्यकर्ताओं पर अंकुश लगाने की भी एक कोशिश की गई है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को समाप्त करने के कई तरह के उपाय सत्ता करती रही है।इस तरह की सेवा को खत्म करना संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकार पर भी हमला है। हम यह मांग करते है कि सरकार को तत्काल यूपीसी की सेवा समाप्त करने के अपने फैसले को वापस लेना चाहिए। हम इस सेवा को समाप्त किए जाने के फैसले के खिलाफ एक अभियान चलाएं। सरकार यदि ये समझती है कि गरीबों के हितों वाली सेवाओं को समाप्त किया जाता है तो इस तरह के फैसलों के खिलाफ आवाज नहीं उठेगी। सिविल सोसायटी को इस तरह के मामूली मामलों में कोई दिलचस्पी नहीं होगी जिस तरह से नमक ( दो रूपये किलो का नमक आज पन्द्रह रूपये से ज्यादा कीमत पर मिलता है और इस बढ़ी कीमत को कोई ठोस कारण समझना किसी के लिए भी मुश्किल है।) की कीमत के बढ़ने के पूरे मामले को समझा गया। लोकतंत्र में सरकार पर यह भरोसा रहता है कि वह जनहित का ध्यान रखेगी। यदि सरकार यह भरोसा तोड़ती है तो यह लोकतंत्र की अवधारणा को खंडित करने की कोशिश मानी जानी चाहिए। आप इस अभियान में साथ दें। डाक विभाग के मंत्रियों और अधिकारियों को ईमेल भेजे।पत्र लिखें।
मंत्रियों के नाम व संपर्क सूत्र इस प्रकार है।

Shri Kapil Sibal 24362333 ( Fax) ,24369191,24362626,23010468, 23795353 (Fax)
23017146 email: mocit@nic.in

2.Minister of State Shri Gurudas Kamat 23372248 23372247 6624 23092626, 23092627 (FAX) 23092626 email: gurudas.kamat@nic.in

3) Minister of State Shri Sachin Pilot 24360958 (fax) 24368757
24368758 24364332 24364333 ,23795060, 23795070, 23795080 ( There is no email address of leader of young mr. sachin pilot

4.Secretary (Posts) & Chairman PS Board ,Ms. Radhika Doraiswamy,email-secretary-posts@indiapost.gov.in

समाचार पत्रों में चिट्ठियां लिखे।फेसबुक और दूसरे सोशल नेटवर्किंग का भी उपयोग करें। जो पत्रकार है वे इसकी खबर लें और दें।सांसदों –विधायकों को भी जगाए।उन्हें सूचित करें कि यूपीसी सेवा समाप्त कर दी गई है। उनसे भी पत्र लिखवाए और बय़ान जारी करवाए। सूचना के अधिकार के तहत केन्द्रीय सरकार के डाक विभाग से यह जानकारी मांगे कि इस सेवा को समाप्त किए जाने की क्या वजह है।आप इस अभियान में दो से पांच मिनट का वक्त भी निकालें तो आपकी भूमिका से सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ेगा।

साथियों की ओर से,
अनिल चमड़िया